كتاب التفسير البسيط (اسم الجزء: 12)

وقال أبو عبيدة (¬1): يعصرون تفسيره ينجون من العصر وهو المنحاة، ومثله العصرة والمعتصر. [والمعصر] (¬2) ومنه قول أبي زبيد (¬3):
ولقد كان عُصْرة المَنْجُودِ
أي: ملجأ الكروب.
وقال عدي بن زيد:
لو بغَيْرِ المَاءِ حَلْقِي شَرِقْ ... كُنْتُ كالغَصَّانِ بالماءِ اعْتِصَارِي (¬4)
أي: التجائي، وأنشد أيضًا للبيد (¬5):
¬__________
(¬1) "مجاز القرآن" 1/ 313.
(¬2) ما بين المعقوفين ساقط من (ج).
(¬3) لأبي زبيد الطائي عجز بيت، وصدره:
صاديًا يستغيث غير مغاث
من قصيدة له يرثي بها اللجاج ابن أخته، وكان من أحب الناس إليه، انظر "ديوانه" ص 44، و"جمهرة أشعار العرب" ص 260، و"الاقتضاب" ص 390، و"اللسان" (عصر) 5/ 2969، و"أمالي اليزيدي" ص 8، و"المحتسب" 1/ 345، والطبري 12/ 233، والقرطبي 9/ 205، و"تهذيب اللغة" (عصر) 3/ 2458.
(¬4) البيت لعدي بن زيد في "ديوانه" ص 93، و"الأغاني" 2/ 94، و"الحيوان" 5/ 138، 593.
انظر: "الكتاب" 1/ 462، و"مجاز القرآن" 1/ 314، و"الجمهرة" 2/ 154، و"اللسان" (عصر) 5/ 2971، والعيني 4/ 454، و"شواهد المغني" 255، و"الخزانة" 3/ 594، 4/ 460، 524، و"البحر المحيط" 5/ 316، و"تهذيب اللغة" (عصر) 3/ 2459، و"الشعر والشعراء" ص 133، وكتاب "العين" 4/ 342.
(¬5) البيت للبيد، ويروى: (بغير معصَّر) "ديوانه" ص 68.
انظر: "الكتاب" 1/ 410، و"الأغاني" 2/ 26، والشنتمري 1/ 462، والجمهرة 2/ 154، و"اللسان" (عصر) 5/ 2969، العيني 4/ 454، و"شواهد المغني" / 255، و"الخزانة" 3/ 394، و"مجاز القرآن" 1/ 295، 314، والطبري 12/ 234، و"تهذيب اللغة" 3/ 2458.

الصفحة 140